शनिवार, मार्च 01, 2008

जहॉं चाहें, वहॉं पत्रिकाऍं

आज बात करते हैं किताबों की दुकान की। जहॉं जाइये अपने पसंद की पत्रिका पढि़ये, वो भी बिना घर से बाहर निकले। जी हॉं, मैं बात कर रहा हूँ एक ऑनलाइन मैगज़ीन स्‍टोर की। इस ऑनलाइन मैगज़ीन स्‍टोर का पता है http://www.ezinemart.com/





इस स्‍टोर में अधिकांश किताबें आप बिना कोई पैसा खर्च किए पढ़ सकते हैं। चाहें तो अपने कम्‍प्‍यूटर पर सेव भी कर सकते हैं। इंडियाटुडे (अंग्रेज़ी और हिन्‍दी), आउटलुक जैसी सामयिक पत्रिकाओं के अलावा बिज़नेसटुडे, मनी ट़डे, आउटलुक प्रोफिट जैसी आर्थिक पुस्‍तकें, महिलाओं की पत्रिकाऍं गृहलक्ष्‍मी, सैवी, न्‍यूवूमैन, लाइफस्‍टाइल पत्रिकाऍं, फिल्‍मी पत्रिकाऍं शोटाइम, स्‍टारडस्‍ट, ऑटोमोबाइल सैक्‍टर की ऑटो भारती से लेकर प्रतियो‍गिता दर्पण जैसी पत्रिकाऍं यहॉं उपलब्‍ध हैं। साथ ही इनमें से कई पत्रिकाओं के पुराने अंक भी आप यहॉं देख सकते हैं।11-12 भागों में बंटे इस साइट पर अभी करीब 35 मैगज़ीन उपलब्‍ध हैं। जिसमें से एकाध को छोड़कर सारी मुफ्त हैं।
सबसे अच्‍छी बात इस साइट के बारे में यह है कि मैगज़ीन पढ़ते वक्‍त उसका रंगरूप बिल्‍कुल वही होता है जैसा कि मुद्रित पुस्‍तक में होता है। एक तरह से छपी हुई किताब को ज्‍यों को त्‍यों नेट पर लगा दिया गया हो।

पन्‍ने पलटने की भी जरूरत नहीं, अनु‍क्रमणिका में अपनी पसंद के लेख पर क्लिक किजिए और सीधे लेख आपके सामने।



आप में से कई लोगों ने शायद यह साइट पहले देखी होगी। मेरे लिए यह नई थी और उपयोगी भी, सोचा आप सबसे साझा करूं।
उपरोक्‍त सारे चित्र ईज़ाइनमार्ट डॉट कॉम से साभार

पुरानी डाक

  • @ द्विवेदी जी, आप जो चाहे वो चित्र अपने ब्‍लॉग पर उपयोग कर सकते हैं। मुझे अच्‍छा लगेगा। चित्र पर मेरे नाम व फ्लिकर एकाउंट या इस चिट्ठे के हाइपर लिंक की अपेक्षा रहेगी।
  • @ यूनूस भाई, कैमरे पर पोस्‍ट जल्‍दी ही लिखूंगा। वैसे भी कैमरे की खरीद पोस्‍ट लायक रही है।
  • @ समीर जी, ममता जी, माला जी, संजीत भाई आप सबको तस्‍वीरें पसंद आई। शुक्रिया। मेरी कोशिश है कि फ्लिकर पर हर 10-15 दिन में कुछ नई तस्‍वीरें डालता रहूँ। देखिएगा।

गुरुवार, फ़रवरी 21, 2008

तस्‍वीरों के बहाने

बचपन से डैडी कों फोटोग्राफी करते देख रहे हैं इसलिए फोटोग्राफी ने छुटपन से ही आकर्षित किया है। आज के इस डिजिटल युग में फोटोग्राफी काफी सस्‍ती हो गई है। हॉं शुरुआती खर्चा ज़रुर है कैमरा लेने का पर उसके बाद तो चाहे जितनी तस्‍वीरें लिजिए, फिल्‍म खत्‍म होने की कोई चिन्‍ता नहीं। साथ ही फिल्‍म धुलवाने और फोटो बनवाने का झंझट भी खत्‍म। जो तस्‍वीर पसंद ना आए हाथों-हाथ डिलीट कर दीजिए।
मुद्दे कि बात यह कि मैंने भी एक कैमरा ले लिया है कुछ दिनों पहले। चूंकि कैमरा लेने के बाद नया-नया शौक है तो घर के कुर्सी मेज सोफा टेबल कप प्‍लेट बाल्‍टी और जो कुछ भी मिल सका सबकी फोटो ले डाली है।
उनमें से कुछ फोटो यहॉं पोस्‍ट कर रहा हूँ। देखें कैसी लगती हैं आपको। टिप्‍पणी किजिएगा।



पहचानिए ज़रा। बिल्‍कुल सही पहचाना। यह वही जॉनसन इअर बड्स हैं।

कोशिश करें इसे पहचानना भी मुश्किल नहीं।




यह सारी और कुछ और तस्‍वीरें आप फ्लिकर पर मेरे पन्‍ने पर देख सकते और चाहे तो वहॉं भी टिपिया सकते हैं। तस्‍वीरों के बारे में तकनीकी जानकारी भी आपको वहीं मिल जाएगी।

सोमवार, फ़रवरी 11, 2008

मेल टुडे में हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग पर लेख

इंडिया टुडे पत्रिका के नए अंग्रेज़ी दैनिक मेल टुडे ने हिन्‍दी चिट्ठाकारी पर एक लेख छापा है।

9 फरवरी को पेज 14-15 पर अभिषेक शुक्‍ला द्वारा लिखे इस लेख को आप मेल टुडे की साइट पर भी देख सकते हैं।

सूचनार्थ प्रेषित